Thursday, 26 July 2018

गांधी जी ने किसानों से कहा था कुछ ऐसा जिसे सुन कर हैरान रेह जाएंगे आप

राष्टपिता महात्मा गांधी के चम्पारण सत्याग्रह को 100 साल पूरे हो गए है। आपको बता दे की महात्मा गांधी जी को खबर मिली की गुजरात के ही खेड़ा में किसानों पर हो रहे अत्याचारों हो रहे है, हम आपको बता दे की जिसके बाद गांधी जी ने 1918 में खेड़ा में सबसे बड़ा किसान आंदोलन चलाया, और आज उस आंदोलन को पूरे 100 साल हो चुके है। यह खेड़ा में किसानों पर अग्रेंजों द्बारा हो रहे अत्याचार की खबर मिलने के बाद गांधी जी ने विठ्ठलभाई पटेल से इसकी जांच करवाई थी और इस जांच मे यह पाया गया कि किसानों पर सरकार बहुल जुल्म कर रही है किसनो को सताया जा रहा है।Related image
इसके बाद गांधी जी अहमदाबाद से सीधा खेड़ा पहुंचे और यह के किसानो के साथ मिलकर सत्याग्रह किया है। दरअसल हम आपको बताते चले की इस किसान आंदोलन की सबसे बड़ी खास बात यह थी कि इसी आंदोलन से ही सरदार वल्लभ भाई ने अपना राजनीति में सफर सिरु किया था। गांधी जी ने खेड़े के किसानों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ अपने अहिंसा के मजबूत हथियार से अपनी आवाज को और ज्यादा बुलंद किया।Image result for gandhiji original photo
दरअसल बात कुछ ये थी की किसानों की मांग थी पहले से उनकी फसल की पैदावार एक चौथाई भी नहीं हुई है और इस कारण सरकार को उनकी लगान माफ कर देनी चाहिए और महात्मा गांधी ने किसानों की इसी मांग को सरकार के सामने रखा और यहा के किसानों के साथ मिलकर सत्याग्रह किया।Image result for gandhiji original photo
और यही नहीं बल्कि इसके साथ ही उन्होंने सत्याग्रह कर रहे लोगों से यह अपील भी की थी कि "अग्रेंज उन पर चाहे जीतने भी जुल्म क्यू न करे, या फिर उन पर डंडे भरसाए या गोलियां चलाए लेकिन किसी को भी प्रतिउत्तर हिंसा बिलकुल भी नहीं करनी हैं। और यही नहीं बल्कि अहिंसा के पुजारी बापू ने सत्याग्रह कर रहें किसानों से यहां तक कह दिया था की "प्रतिज्ञा तोड़कर यानी हिंसा करके मुझे दुख पहुंचाने से अच्छा है कि रात में आकर मेरी गर्दन काट देना।Related image
इस आंदोलन में गांधी की सरकार से यही मांग थी। की कुदरत के केहर से किसानों की फसल बर्बाद हो गई है ऐसे में सरकार को उनका पूरा का पूरा कर अगले साल तक के लिए स्थगित कर देना चाहिए। आपको बापू से किया सीख मिली कमेंट मे हमे जरूर बताना और आप हा,ए फॉलो भी कर सकते है शुक्रिया।

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