Wednesday, 4 July 2018

एक राजपूत राजा को हराने के लिए बाबर की सेना ने एक ही रात में काट डाला था पूरा पहाड़

वैसे तो भारत में कई ऐसे किले और गढ हैं लेकिन चंदेरी का किला आज भी राजपूतों के शौर्य और राजपुतानियों के जौहर की गाथा गाता है. यह तो आपको पता होगा की इतिहास प्रसिद्ध चंदेरी का युद्ध 6 मई, 1529 ई. को मुग़ल बादशाह बाबर और राजपूतों के बीच मे हुआ था. आपको बता दे की चंदेरी का प्रसिद्ध दुर्ग मेदनीराय इस पर बाबर की नजर थी. खानवा युद्ध के बाद ही बाबर इसकी ओर को बढ़ा. बाबर ने फिर मेदनीराय पर अपना धावा बोला दिया लेकिन मेदनीराय ने किले का फाटक बंद कर दिया गया था। 

चंदेरी का दुर्ग यह किला एक 230 फ़ीट ऊंची चट्टान पर बना हुआ था. और यह बुंदेलखंड की सीमाओं पर स्थित होने से महत्वपूर्ण था. यह किला पहाड़ियों से घिरा हुआ था और इसलिए यह किला बेहद सुरक्षित माना जाता था. यह किला बाबर के बहुत पसंद था और इसलिए उसने चंदेरी के तत्कालीन राजपूत राजा से यह किला माँगा. भी था और इसके बदले उसने अपने सारे किलों में से कोई भी एक किला देने की पेशकश भी की थी लेकिन राजा चंदेरी ने यह किला देने से साफ इंकार कर दिया और तब बाबर् ने किला युद्ध से जीतने की चेतावनी दी बाबर कई प्रस्तावों देने के बाद भी मना कर दिया. बाबर के प्रलोभनों को नकार कर मेदनी ने बाबर से युद्ध करना स्वीकार किया। 

बाबर ने किले पर घेरा जारी रखा बाबर की सेना के पास हाथी तोपें और भारी हथियार थे जिन्हें लेकर उन पहाड़ियों के पार जाना बेहद मुसकिल था फिर बाबर ने एक ही रात में अपनी सेना से पहाडी को काट डालने को कहा सेना ने एक ही रात में पहाड़ी को ऊपर से नीचे तक काट दिया जिससे सेना हाथी तोपें किले के सामने पहुँच गयी और अब उसे ‘कटा पहाड़’ या ‘कटी घाटी’ के नाम से जाना जाता है। बाबर फोटो

मेदनीराय ने सुबह अपने किले के सामने बाबर की पूरी सेना को देखा तो बह दंग रह गया. लेकिन राजा ने सिपाहियों के साथ बाबर की सेना का सामना करने का निर्णय लिया बाबर ने किले पर इतनी जोर से हमला किया कि राजपुतानियों ने अपनी अस्मत बचाने को जौहर किया और अन्त मे राजपूत की सेना बाबर से हार गई और किले पर बाबर का अधिकार हो गया। 

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