Tuesday, 26 June 2018

क्या आप जानते हो नाथूराम गोडसे ने महात्मा 'गांधी' को कब और क्यों मारा था

आज हम आपको महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे के बारे में बताने जा रहे हैं. आखिर उसने महात्मा गांधी की हत्या क्यों की थी तो चलिये जानते है की आखिर कौन था नाथूराम गोडसे और क्यों की थी उसने महात्मा गांधी की हत्या सबसे पहले आपको बता दे की नाथूराम गोडसे का जन्म 19 मई साल 1910 को पुणे के एक चित्पावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था. गोडसे के पिता विनायक वामनराव गोडसे एक पोस्ट ऑफिस में काम करते थे और नाथूराम गोडसे इनकी माँ का नाम लक्ष्मी था। नाथूराम गोडसे ने महात्मा 'गांधी' को कब और क्यों मारा था
पाकिस्तान की मदद करने के लिए गांधी जी से नाराज था नाथूराम गोडसे बता दे की विभाजन के बाद पाकिस्तान ने भारत देश से 55 करोड़ रुपए मांगे थे. लेकिन भारत सरकार ने पहले देने से इंकार कर दिया था लेकिन गांधीजी के दबाव में आकार यह रुपए पाकिस्तान को दिए गए थे और इसी बात को लेकर अन्य हिंदूवादियों की तरह गोडसे भी महात्मा गांधी जी से नाराज हो गया था। Related image
नाथूराम के साथ उसके और दो साथी भी थे जिंका नाम नारायण आप्टे और विष्णु रामकृष्ण उसने इनके साथ मिलकर पुणे में 30 जनवरी के अपने प्लान को पूरा करने के लिए योजना बनाई थी इस योजना के तहत दोनों ने पहले ही दिल्ली पहुंचकर माहौल का जायजा लिया था फिर 27 जनवरी को मुंबई से विमान आप्टे और गोडसे दिल्ली पहुंचे. गोडसे और आप्टे रेल से उसी दिन भोपाल निकल गए. और वहां अपने एक मित्र से मिले जिसने उन्हें एक सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल दिलाई. दोनों 29 तारीख को फिर दिल्ली पहुंच गए. थे। Related image
30 जनवरी दोपहर को करीब 3 बजे गोडसे, आप्टे और करकरे बिड़ला हाउस के लिए निकले. गोडसे जब बिड़ला हाउस पहुंचा तो देखा वहां कुछ खास तलाशी नहीं हो रही थी, जिस कारण वह आराम से पिस्तौल लेकर अंदर घुस गया. था और अंदर जा कर गोडसे पहले तो गांधी जी के रास्ते मे खड़ा हो गया फिर जब गांधी जी ने उसे रास्ता देने के लिए कहा तो कोई कुछ समझ पाता गोडसे ने आभा को धक्का देकर पीछे कर दिया और सामने से गांधी जी के सीने पर तीन गोलियां दाग दीं। नाथूराम गोडसे ने महात्मा 'गांधी' को कब और क्यों मारा था
गांधी जी को गोली मारकर गोडसे भागने की बजाए अपना हाथ ऊपर कर पुलिस को बुलाने लगा. जब भीड़ में मौजूद पुलिस उसे दिखी तो उसने उन्हें आवाज दी और अपनी पिस्तौल पुलिस को सौंप दी. शाम 5:45 पर आकाशवाणी ने गांधी के निधन की सूचना देश को दी. यह थी पूरी कहानी। 

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