Tuesday, 1 May 2018

आखिर 3000 फ़ीट की चोटी पर गणेश जी की मूर्ती को किसने रखा

आज से कुछ समय पहले ही पुरातत्व विभाग ने छत्तीसगढ़ राज्ये के दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से लगभग 30 किलो मीटर की दूरी पर दुर्गम ढोल कल की पहाड़ियां है. और इन पदड़ियों पर लगभग 3000 फ़ीट की ऊंचाई पर सैकड़ों साल से भी ज्यादा पुरानी, मूर्ति नागवंशीय राजाओं द्वारा स्थापित एक भव्य गणेश जी की प्रतिमा को खोज निकाला है लेकिन अब यह मूर्ति लोगो के लिए एक आश्चर्य का कारण बनी हुई है।

हम आपको बता दे की कोई भी यह बात नहीं समझ पा रहा है. की सैकड़ों साल पहले और वो भी इतने दुर्गम इलाके में इतनी ज्यादा ऊंचाई पर आखिर क्यों और किसने गणेश प्रतिमा की स्थापना की थी। आपको यह बात जानकार हैरानी होगी की आज भी इस जगहा पर पहुँचाना बहुत ज्यादा जोखिम भरा काम है. तो पिछले ज़माने में यह और भी ज्यादा जोखिम भरा रहा होगा। तो आखिर कैसे और क्यों यह गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है. बता दे की यह पर पुरात्वविदों का एक अनुमान यह भी है की दंतेवाड़ा क्षेत्र के रक्षक के रूप नागवंशियों ने गणेश जी यहाँ स्थापना की थी।
हम आपको यह भी बता दे की इस पहाड़ी पर स्थापित 6 फीट ऊंची 21/2 फीट चौड़ी ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित यह प्रतिमा वास्तुकला की दृष्टि से अत्यन्त कलात्मक है। और हाँ इस गणपति की मूर्ति में ऊपरी दांये हाथ में फरसा तो बही ऊपरी बांये हाथ में टूटा हुआ एक दंत है. और नीचे दांये हाथ में अभय मुद्रा में अक्षमाला धारण किए हुए है. नीचे के बांये वाले हाथ में मोदक है। लेकिन पुरात्वविदों के मुताबिक इस प्रकार की प्रतिमा बस्तर क्षेत्र में कहीं भी नहीं मिलती है।
बैसे पौराणिक कथा के अनुसार अगर माना जाए तो एक बार परशुराम जी शिवजी से मिलने कैलाश पर्वत पर गए थे। लेकिन उस समय शिवजी विश्राम में थे। यह बात तो शायद आपको पता होगी की गणेश जी उनके रक्षक के रूप में विराजमान थे। जब गणेश जी ने परशुराम जी को शिवजी से मिलने से रोका था तब परशुराम जी उनकी इस बात से बहुत ज्यादा क्रोधित हो गए थे। और गुस्से में उन्होंने अपने फरसे से ही गणेश जी का एक दांत काट दिया था और तब से गणेश जी एकदंत कहलाए थे।

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